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2040 तक नवीकरणीय ऊर्जा में पूर्ण रूपांतरण केरल के लिए चुनौतीपूर्ण: अध्ययन
केरल को 2040 तक विद्युत मांग को पूरी तरह नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करने के लिए कम से कम 27 गीगावाट की अतिरिक्त क्षमता जोड़नी होगी। एक नए अध्ययन में थर्मल ऊर्जा के बिना इस लक्ष्य को हासिल करना एक बड़ी चुनौती बताया गया है।
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केरल की ऊर्जा नीति को आकार देने वाले एक महत्वपूर्ण अध्ययन में पता चला है कि राज्य को अपनी 2040 की विद्युत मांग को पूरी तरह से नवीकरणीय स्रोतों, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा से पूरा करने के लिए काफी बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। शोध के अनुसार, इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए कम से कम 27 गीगावाट की अतिरिक्त नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का निर्माण आवश्यक है।
अध्ययन से संकेत मिलता है कि थर्मल विद्युत संयंत्रों पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करना महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। राज्य की भौगोलिक सीमाएं और मौजूदा बुनियादी ढांचे को देखते हुए इतनी बड़ी नवीकरणीय क्षमता जोड़ना एक जटिल प्रक्रिया साबित हो सकता है। सौर और पवन ऊर्जा जैसे पारंपरिक नवीकरणीय स्रोतों के अलावा, राज्य को नई और उभरती ऊर्जा तकनीकों में भी निवेश करना पड़ सकता है।
शोध संस्था के अनुमान से यह स्पष्ट है कि केरल अपने स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्य को पूरा करने के लिए वित्तीय और तकनीकी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करेगा। हालांकि, राज्य की अक्षय ऊर्जा के प्रति प्रतिबद्धता और दशक के मध्य तक प्रमुख लक्ष्य को हासिल करने की इच्छा इस दिशा में आगे की कार्रवाई को प्रेरित कर सकती है।