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मुथांगा आंदोलन में यातना का शिकार शिक्षक को 12.5 लाख का मुआवजा
केरल सरकार ने 2003 के मुथांगा भूमि आंदोलन के दौरान हिरासत में यातना झेलने वाले एक शिक्षक को 12.5 लाख रुपये का मुआवजा देने का निर्णय लिया है। 23 वर्षीय कानूनी संघर्ष के बाद के.के. सुरेंद्रन को यह मुआवजा मिलेगा।
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के.के. सुरेंद्रन, जो एक शिक्षक हैं, को 2003 में मुथांगा भूमि आंदोलन के समय गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस हिरासत में गंभीर यातना का सामना करना पड़ा था। राज्य सरकार ने उन्हें हुए अत्याचार के लिए अब मुआवजे के रूप में 12.5 लाख रुपये देने का निर्णय लिया है।
सुरेंद्रन के लिए यह मुआवजा दो दशकों से अधिक के कानूनी संघर्ष का परिणाम है। उस समय की घटनाओं में उनके साथ हुई गैरकानूनी कारवाई और यातना के मुद्दे को न्यायालय तक ले जाया गया था।
मुथांगा भूमि आंदोलन 2003 में केरल में एक महत्वपूर्ण घटना थी, जिसमें आदिवासी समुदाय की भूमि संबंधी मांगों को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। इस आंदोलन के दौरान कई लोग गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई का शिकार हुए थे।
यह मुआवजा भारतीय न्याय प्रणाली में यातना और मानवाधिकार हनन के खिलाफ राज्य की जवाबदेही को स्वीकार करता है। सुरेंद्रन के केस में सरकार की यह कार्रवाई अन्य पीड़ितों के लिए भी एक मिसाल स्थापित करती है।