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हाथी जुलूस के लिए मंदिर की याचिका खारिज, केरल HC ने सुप्रीम कोर्ट का समय सीमा बढ़ाने से इनकार किया
केरल उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित समय सीमा को बढ़ाने का अधिकार न तो उच्च न्यायालय को है और न ही सरकार को। न्यायाधीश बेचु कुरियन थॉमस ने मंदिर की याचिका को खारिज कर दिया है।
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केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित कानूनी समय सीमा को न तो उच्च न्यायालय और न ही सरकार बढ़ा सकते हैं। न्यायाधीश बेचु कुरियन थॉमस ने यह निर्णय हाथी जुलूस आयोजन से संबंधित एक मंदिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
न्यायाधीश ने माना कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई समय सीमा को बिना किसी एक्सटेंशन के ही पालन किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस निर्धारित अवधि के बिना किसी विस्तार के, उच्च न्यायालय का विलंबित पंजीकरण का निर्देश देना या समय विस्तार की याचिका पर विचार करने का निर्देश देना उचित नहीं है।
यह फैसला संवैधानिक सत्ता के पृथक्करण के सिद्धांत को रेखांकित करता है। न्यायाधीश का स्पष्ट संदेश है कि कोई भी अन्य न्यायिक या कार्यपालिका निकाय सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए आदेशों को संशोधित या विस्तारित नहीं कर सकता।
यह निर्णय न केवल इस मामले में बल्कि सामान्य रूप से न्यायिक प्रक्रिया में समय सीमा के महत्व को भी रेखांकित करता है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक आदेशों का पालन करना अनिवार्य है और किसी प्रकार की छूट देना संवैधानिक नियमों के विरुद्ध है।