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कपड़ों का चुनाव नागरिक का अधिकार: केरल हाईकोर्ट
केरल उच्च न्यायालय ने एक स्कूल प्रधानाध्यापिका के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिन्हें चूड़ीदार पहनने के कारण प्रवेश से रोका गया था। अदालत ने माना कि वस्त्र चयन व्यक्तिगत अधिकार है।
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केरल उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि किसी भी नागरिक को उसके द्वारा पहने जाने वाले कपड़ों को लेकर भेदभाव का सामना नहीं करना चाहिए। अदालत ने कोल्लम जिले के एक स्कूल के प्रधानाध्यापिका की याचिका पर यह निर्णय दिया।
मामले में स्कूल प्रबंधक द्वारा प्रधानाध्यापिका को चूड़ीदार पहनने के कारण स्कूल में प्रवेश से रोका जाना शामिल था। प्रधानाध्यापिका ने स्कूल प्रबंधक को अयोग्य घोषित करने की याचिका दायर की थी। उन्होंने तर्क दिया कि उन्हें साड़ी पहनने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
हाईकोर्ट के फैसले ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के वस्त्र चयन पर अनुचित प्रतिबंध लगाना गलत है, जब तक कि वह शालीन हो और पेशेवर मानदंडों को पूरा करता हो। अदालत ने माना कि व्यक्तिगत स्वायत्तता और व्यक्तिगत पसंद के अधिकार को सम्मान दिया जाना चाहिए।
यह फैसला कार्यस्थलों पर भेदभाव के खिलाफ महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है और नियोक्ताओं को कर्मचारियों के व्यक्तिगत विकल्पों में हस्तक्षेप न करने का संदेश देता है।