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केरल उच्च न्यायालय ने संस्कृत विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार की

केरल उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय के पक्ष में फैसला सुनाते हुए कहा कि निलंबित छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने का आदेश गलत था। न्यायालय ने पाया कि एकल पीठ ने छात्रों द्वारा पात्रता का कोई सबूत दिए बिना यह निर्देश जारी किए थे।

LSN India · 3 November 2026

केरल उच्च न्यायालय ने संस्कृत विश्वविद्यालय की अपील स्वीकार की

न्यायमूर्ति अनिल के. नरेंद्रन और एस. मुरली कृष्ण की खंडपीठ ने विश्वविद्यालय के खिलाफ दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एकल पीठ द्वारा लिए गए निर्णय में पर्याप्त साक्ष्य का अभाव था। खंडपीठ का विचार था कि परीक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से पहले छात्रों को अपनी योग्यता और पात्रता के बारे में ठोस सबूत प्रस्तुत करने चाहिए थे।

यह मामला श्री शंकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा दायर एक याचिका से संबंधित है जिसमें विश्वविद्यालय निलंबित छात्रों को परीक्षा देने की अनुमति देने के आदेश को चुनौती दे रहा था। एकल पीठ के पिछले आदेश को विश्वविद्यालय ने अपील के माध्यम से चुनौती दी थी।

खंडपीठ ने अपने निर्णय में कहा कि न्यायालय द्वारा किसी भी अकादमिक निर्णय में तभी हस्तक्षेप करना चाहिए जब वह स्पष्ट रूप से अनुचित या मनमाना हो। इस मामले में, छात्रों ने अपनी पात्रता के संबंध में पर्याप्त दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए थे जो परीक्षा में शामिल होने के लिए आवश्यक था।

यह निर्णय उच्च शिक्षा संस्थानों के अनुशासनात्मक कार्यों और न्यायालयीय हस्तक्षेप के बीच संतुलन के बारे में महत्वपूर्ण सवाल उठाता है।