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केरल की अदालतों से सदियों पुरानी परंपरा विदा होने लगी
केरल हाईकोर्ट की नियम समिति ने संपत्ति जब्ती की सूचना देने वाली परंपरागत घोषणा प्रणाली को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह परंपरा रियासतकालीन दौर से चली आ रही थी और औपनिवेशिक काल के बाद भी कई अदालतों में जारी रही।
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मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के अभियान के बाद केरल उच्च न्यायालय की नियम समिति ने 'तम-तम' और 'किन्नम मुट्टी विलंबरम' जैसी परंपरागत घोषणा प्रणाली को समाप्त करने का फैसला किया है। ये विधियां जनता को संपत्ति जब्ती की कार्यवाही के बारे में सूचित करने के लिए उपयोग में आती थीं।
यह परंपरा केरल की रियासतकालीन व्यवस्था से जुड़ी हुई है और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान भी बनी रही। आजादी के बाद भी कई जिला और उच्च न्यायालयों में इस प्रथा का पालन किया जाता रहा। साल 2016 में इस सेवा के लिए शुल्क में भी वृद्धि की गई थी, जिससे यह 15 रुपये से बढ़कर 100 रुपये हो गया था।
हाईकोर्ट की नियम समिति के इस निर्णय से न केवल एक पुरानी परंपरा को विधिक व्यवस्था से हटाया जा रहा है, बल्कि अदालती कार्यप्रणाली को आधुनिकीकृत करने की दिशा में भी कदम उठाया जा रहा है। विधিक सूचनाओं के प्रचार के लिए अब आधुनिक माध्यमों का उपयोग किया जा सकेगा।