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निष्क्रिय रहे चिकित्सा स्नातकों पर केरल हाईकोर्ट की आलोचना
केरल हाईकोर्ट ने सरकार को 23 स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों के लिए अतिरिक्त पद सृजित करने का निर्देश दिया है। ये छात्र अपनी अनिवार्य चिकित्सा प्रतिबद्धता के तहत सीनियर रेजिडेंट के रूप में कार्य करेंगे।
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केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को राज्य सरकार पर कड़ी आलोचना की, कहा कि स्नातकोत्तर चिकित्सा छात्रों को निष्क्रिय रखना 'राष्ट्रीय बर्बादी' है। न्यायालय ने यह टिप्पणी एक याचिका सुनते समय दी जिसमें 23 पोस्टग्रेजुएट छात्रों की नियुक्ति का मुद्दा उठाया गया था।
न्यायालय ने निर्देश दिया है कि केरल सरकार तुरंत इन 23 छात्रों के लिए अतिरिक्त (सुपरन्यूमरेरी) पद सृजित करने का निर्णय ले। ये छात्र अपनी अनिवार्य चिकित्सा प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए सीनियर रेजिडेंट के पद पर नियुक्त होंगे। न्यायालय के अनुसार, इन छात्रों की अवधि उनके परीक्षा परिणाम प्रकाशित होने की तारीख से शुरू होगी।
शिक्षा के क्षेत्र में दक्षता की कमी और संसाधनों के सही उपयोग को लेकर न्यायालय की चिंता स्पष्ट थी। अदालत ने कहा कि योग्य पेशेवरों को बेकार बैठे रहने देना न केवल व्यक्तिगत नुकसान है, बल्कि देश के लिए भी हानिकारक है।
यह निर्णय राज्य के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता और संस्थानों की जवाबदेही को लेकर बढ़ती चिंता के बीच यह आदेश आया है।