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कन्नूर से लद्दाख तक की यात्रा, जुनैस शतार ने तोड़ी दिव्यांगता की सीमाएं
33 वर्षीय जुनैस शतार ने विशेष रूप से अनुकूलित वाहन में अकेले यात्रा करते हुए करीब 3,700 किमी की दूरी तय की। इस साहसिक यात्रा ने न केवल उन्हें नया आत्मविश्वास दिया, बल्कि दिव्यांग लोगों को भी दूर की यात्रा करने के लिए प्रेरित किया।
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केरल के कन्नूर जिले के 33 वर्षीय जुनैस शतार ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने विशेष रूप से अनुकूलित वाहन में अकेले यात्रा करते हुए लद्दाख तक का सफर तय किया, जिसमें लगभग 3,700 किमी की दूरी शामिल है।
शतार की यह यात्रा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए एक प्रेरणा बन गई है। उन्होंने इस यात्रा को अपने जीवन में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना है, जिसने उन्हें नया आत्मविश्वास प्रदान किया है। इसके साथ ही, उनके इस साहसिक प्रयास ने अन्य दिव्यांग व्यक्तियों को भी अपने घर से दूर यात्रा करने और नई चीजें आजमाने के लिए प्रोत्साहित किया है।
विशेष रूप से अनुकूलित वाहन में यह लंबी यात्रा दिव्यांगजन समुदाय के लिए आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता का प्रतीक है। शतार की यह पहल दिखाती है कि सही साधन और आत्मविश्वास के साथ, शारीरिक सीमाएं किसी भी बाधा को रोक नहीं सकती।