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केरल में आवारा कुत्तों की समस्या के लिए विशेषज्ञ पैनल ने दस साल की रोडमैप दी
केरल के विशेषज्ञ समिति ने आवारा कुत्तों की आबादी को नियंत्रित करने के लिए एक नई रणनीति प्रस्तावित की है। पारंपरिक नसबंदी और छोड़ने के तरीके की जगह अब गोद लेने और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन पर जोर दिया जाएगा।
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केरल में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को हल करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने एक महत्वाकांक्षी दशकीय योजना तैयार की है। समिति के अनुसार, पारंपरिक नसबंदी और छोड़ने की प्रणाली से हटकर गोद लेने पर आधारित मॉडल अपनाना चाहिए। इस नई रणनीति में व्यक्तिगत और संस्थागत स्तर पर कुत्तों को गोद लेना तथा वैज्ञानिक तरीके से कचरे का प्रबंधन करना शामिल है।
समिति ने सुझाव दिया है कि जो लोग वयस्क कुत्तों को गोद लेंगे उन्हें मासिक रखरखाव भत्ता दिया जाए। इसके अलावा, स्कूल, कॉलेज और अन्य संस्थानों को भी कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाए। इस दृष्टिकोण का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी और संस्थागत जिम्मेदारी के माध्यम से आवारा कुत्तों की संख्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मत है कि वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन आवारा कुत्तों के भोजन के स्रोत को सीमित करेगा, जिससे स्वाभाविक रूप से उनकी जनसंख्या में कमी आएगी। समिति के अनुसार, यह समन्वित दृष्टिकोण न केवल कुत्तों की समस्या को हल करेगा बल्कि पशु कल्याण को भी सुनिश्चित करेगा। प्रस्तावित रोडमैप को राज्य सरकार द्वारा अगले दशक में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।