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केरल विद्युत संकट समाधान के लिए जर्मनी के साथ ऊर्जा भंडारण समझौता
केरल विद्युत बोर्ड ने जर्मनी की विकास एजेंसी जीआईजेड और भारतीय ऊर्जा संस्थान के साथ ऊर्जा भंडारण समझौते को मंजूरी दे दी है। राज्य सरकार की अनुमति मिलने के बाद यह समझौता औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित होगा।
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केरल विद्युत बोर्ड (केएसईबी) ने नवीकरणीय ऊर्जा भंडारण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए जर्मनी की विकास एजेंसी जीआईजेड और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टिट्यूट (डब्ल्यूआरआई) इंडिया के साथ एक समझौता पत्र को मंजूरी दे दी है। यह समझौता राज्य की विद्युत आपूर्ति के संकट को कम करने और नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
प्रस्तावित समझौता पत्र जीआईजेड द्वारा नई और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सहयोग से संचालित 'भारत में नवीकरणीय ऊर्जा एकीकरण के लिए ऊर्जा भंडारण' परियोजना के तहत लाया गया है। इस परियोजना का उद्देश्य भारतीय राज्यों में बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण समाधान स्थापित करना है।
केएसईबी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, समझौते को औपचारिक रूप से हस्ताक्षरित करने के लिए केरल सरकार की मंजूरी की प्रतीक्षा की जा रही है। इस सहयोग के माध्यम से केरल अपनी अक्षय ऊर्जा क्षमता में वृद्धि करने और विद्युत आपूर्ति में स्थिरता लाने का प्रयास करेगा।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बैटरी भंडारण प्रणाली का विकास भारत जैसे देशों में सौर और पवन ऊर्जा के अधिकतम उपयोग में मदद दे सकता है। केरल के इस कदम को राष्ट्रीय स्तर पर अक्षय ऊर्जा लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।