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केरल में निपाह रोगियों की मौत: सरकार का दावा, विपक्ष का जवाब
केरल में निपाह वायरस से मरने वाले मरीजों की मौत में एंटीवायरल दवाओं की भूमिका को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सरकार और विपक्षी दल एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं।
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केरल में निपाह वायरस संक्रमण से हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार और विपक्षी दलों के बीच तीखा विवाद सामने आया है। सरकार का दावा है कि मरीजों के इलाज में इस्तेमाल की गई एंटीवायरल दवाएं समय-सीमा समाप्त हो चुकी थीं, जबकि विपक्षी पार्टियां इस आरोप को खारिज कर रही हैं।
सरकारी पक्ष का मानना है कि चिकित्सा प्रशासन द्वारा गलत दवाएं दी गईं, जिससे रोगियों की स्थिति और बिगड़ी। इस संबंध में सरकार का तर्क है कि समय-सीमा समाप्त दवाइयां रोगियों के लिए हानिकारक साबित हुईं। वहीं, विपक्षी दल इस दावे को राजनीतिक प्रचार बताते हुए इसका विरोध कर रहे हैं।
वैज्ञानिक और चिकित्सीय विशेषज्ञों से भी इस मामले में स्पष्टीकरण मांगे जा रहे हैं। इस पूरे प्रकरण के बीच राज्य सरकार को जांच के आदेश देने के लिए मजबूर किया गया है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा दवाइयों की गुणवत्ता और उनके संग्रहण की जांच की घोषणा की गई है।
निपाह वायरस के प्रकोप में जान गंवाने वाले परिवार इस विवाद के बीच न्याय की मांग कर रहे हैं। मरीजों के इलाज में चूक या लापरवाही का कोई भी सबूत आ सकता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इस समय पूरा ध्यान तथ्यों के आधार पर जांच पूरी करने पर है।