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केरल के शोधकर्ताओं ने पार्किंसंस रोग और आंत के बैक्टीरिया के बीच संबंध खोजा

केरल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और सशचिकित्सा विज्ञान संस्थान के संयुक्त अध्ययन में पार्किंसंस के रोगियों और स्वस्थ व्यक्तियों के आंत के बैक्टीरिया में महत्वपूर्ण अंतर पाया गया है।

LSN India · 29 October 2026

केरल के शोधकर्ताओं ने पार्किंसंस रोग और आंत के बैक्टीरिया के बीच संबंध खोजा

तिरुवनंतपुरम में किए गए एक नए अध्ययन से पार्किंसंस रोग और आंत के माइक्रोबियल संरचना के बीच गहरा संबंध उजागर हुआ है। कुसात और एससीटीआईएमएसटी के शोधकर्ताओं की टीम ने पाया है कि पार्किंसंस से ग्रस्त रोगियों के आंत में बैक्टीरिया की विविधता और संरचना स्वस्थ व्यक्तियों से काफी भिन्न होती है।

यह शोध इस बढ़ती हुई समझ को रेखांकित करता है कि गट माइक्रोबायोम न केवल पाचन स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि तंत्रिका तंत्र के कार्यों पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। पार्किंसंस रोग एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनरेटिव विकार है जो लाखों लोगों को प्रभावित करता है और इसके कारणों को पूरी तरह समझा नहीं जा सका है।

इस खोज से भविष्य में पार्किंसंस रोग की रोकथाम और उपचार के नए तरीके विकसित करने में मदद मिल सकती है। शोधकर्ताओं का मानना है कि आंत के बैक्टीरिया में असंतुलन को ठीक करके इस रोग के लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है।

इस प्रकार के अनुसंधान भारतीय चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण योगदान माने जा रहे हैं, विशेषकर तब जब तंत्रिका संबंधी रोग भारत में बढ़ती स्वास्थ्य चुनौती बन रही है।