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केरल में घरेलू नर्सों के साथ दुर्व्यवहार, नियमों की कमी बनी समस्या
केरल में बुजुर्गों की देखभाल के लिए घरेलू नर्सों की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन नियामक ढांचे की कमी के कारण ये कर्मचारी शोषण का शिकार हो रहे हैं।
LSN India ·

समाज में परिवर्तनशील संरचना के कारण केरल में बुजुर्गों की देखभाल एक प्रमुख चुनौती बन गई है। परिवारों के लिए घरेलू नर्सों की सहायता अब अनिवार्य हो गई है, जिससे इस क्षेत्र में कर्मचारियों की मांग निरंतर बढ़ रही है।
हालांकि घरेलू नर्सों की बड़ी मांग है, लेकिन उन्हें कार्यस्थल पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उचित नियमन और कानूनी सुरक्षा के अभाव में ये कर्मचारी अक्सर शोषण, वेतन संबंधी विवाद और कार्य की अनिश्चितता से जूझते हैं। उनके कार्य घंटे अनियमित होते हैं और सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं प्राय: अपर्याप्त रहती हैं।
हितधारकों के साथ बातचीत से पता चलता है कि घरेलू नर्सिंग क्षेत्र में एक व्यवस्थित नियामक ढांचे की तुरंत आवश्यकता है। राज्य सरकार को इस महत्वपूर्ण पेशे को स्वीकृति देनी चाहिए और कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन, कार्य अवधि और स्वास्थ्य बीमा जैसी सुविधाओं को सुनिश्चित करना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि केरल जैसे विकसित क्षेत्रों में भी घरेलू कामगारों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत कानूनी व्यवस्था की कमी एक गंभीर खामी है। इस समस्या के समाधान के लिए सरकार, नियोक्ताओं और श्रमिक संगठनों को मिलकर काम करने की जरूरत है।