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मानसून कम होने के बाद भी केरल की जलविद्युत झीलों में बढ़ोतरी
28 अगस्त को केरल की संयुक्त जलभंडारण क्षमता कुल क्षमता का 63 प्रतिशत रही, जो 2,601.34 मिलियन यूनिट के बराबर है। मानसून की कमी के बावजूद यह वृद्धि केरल की ऊर्जा स्थिति को सकारात्मक संकेत दे रही है।
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केरल की जलविद्युत परियोजनाओं के जलभंडार में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है, भले ही राज्य को इस मानसून में सामान्य से कम वर्षा का सामना करना पड़ा है। अगस्त के अंतिम सप्ताह में किए गए आकलन में पाया गया कि संयुक्त भंडारण अपनी कुल क्षमता के तीन-पांचवें हिस्से तक पहुंच गया है।
28 अगस्त तक की आधिकारिक गणना के अनुसार, केरल के सभी जलविद्युत बांधों में कुल 2,601.34 मिलियन यूनिट विद्युत ऊर्जा के समतुल्य जल संचित था। यह आंकड़ा बताता है कि भंडारण स्तर 63 प्रतिशत पर स्थिर रहा है, जो औसत मानसून की स्थिति में आशाजनक माना जाता है।
इस वर्ष मानसून सीजन में केरल को कम वर्षा का सामना करना पड़ा है, लेकिन राज्य की प्रमुख जलविद्युत परियोजनाओं का दक्ष प्रबंधन और पानी के संरक्षण के उपायों के कारण भंडारण में यह स्थिरता संभव हुई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में नियमित वर्षा होती रहे, तो भंडारण स्तर और बेहतर हो सकता है।
जलविद्युत भंडारण केरल की विद्युत उत्पादन क्षमता का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वर्तमान स्तर राज्य को आने वाले महीनों में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता बनाए रखने में मदद करेगा, भले ही मानसून का प्रदर्शन औसत से कम रहा हो।