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केरल में वामपंथी गठबंधन में खटपट, सीपीआई और सीपीआई(एम) एक-दूसरे पर हमलावर
केरल की वामपंथी एकता में दरार दिखाई दी है। सीपीआई ने सीपीआई(एम) के नेता के आरोपों का जवाब दिया है और 1970 के दशक में दक्षिणपंथी दलों के साथ गठजोड़ का आरोप लगाया है।
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केरल की लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) में वामपंथी दलों के बीच विरोध की स्थिति पैदा हो गई है। सीपीआई(एम) के राज्य सचिवालय सदस्य सी.एन. मोहनन ने देशभिमानी पत्रिका में जो आलोचनात्मक लेख लिखा है, उसके जवाब में सीपीआई नेता बिनय विश्वम ने पलटवार किया है।
बिनय विश्वम के अनुसार सीपीआई(एम) ने 1970 के दशक की शुरुआत में अत्यधिक दक्षिणपंथी पार्टियों का समर्थन किया था। इस विवाद ने दोनों वामपंथी दलों के बीच पारस्परिक आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू कर दिया है। दोनों पक्ष एक-दूसरे की विरासत और ऐतिहासिक भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
इस बीच भारतीय यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने सीपीआई के प्रति अपने संपर्क बढ़ाने की कोशिश की है। यह कदम एलडीएफ के भीतर की राजनीतिक गतिविधियों में नई जटिलता जोड़ता है। केरल की राजनीति में यह विकास गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े करता है।