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ओणम की धार्मिक जड़ों को लेकर केरल में बहस तेज
केरल में ओणम को सांस्कृतिक और कृषि पर्व के रूप में प्रस्तुत करने की प्रवृत्ति को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। आलोचकों का कहना है कि महाबली-वामन कथा से जुड़े इस त्योहार की धार्मिक पहचान को कमजोर किया जा रहा है।
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केरल में ओणम का त्योहार परंपरागत रूप से हिंदू धर्मग्रंथों से जुड़ा हुआ माना जाता रहा है। महाबली और वामन की कथा इस पर्व का मूल आधार है, लेकिन हाल के वर्षों में इसे एक सर्वव्यापी सांस्कृतिक उत्सव के रूप में प्रस्तुत किए जाने की प्रवृत्ति देखी जा रही है।
राज्य में ओणम को मनाने में सभी धर्मों के लोग सक्रिय रूप से भाग लेते हैं और इसके सांस्कृतिक महत्व को स्वीकार करते हैं। तथापि, कुछ सामाजिक माध्यमों पर यह तर्क दिया जा रहा है कि ओणम मूलतः केरल की सामान्य संस्कृति और कृषि परंपरा से जुड़ा त्योहार है, न कि किसी विशेष धर्म का।
आलोचकों का मानना है कि जहां ईद और क्रिसमस की धार्मिक पहचान को स्पष्टता से स्वीकृति दी जाती है, वहीं ओणम की ऐतिहासिक और धार्मिक जड़ों को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। वे इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह धार्मिक पहचान को साझा सांस्कृतिक पहचान में बदलने का सचेत प्रयास है।
धार्मिक समूहों का तर्क है कि त्योहारों की उत्पत्ति और सांस्कृतिक विकास दोनों पहलुओं को समान महत्व दिया जाना चाहिए। ओणम की बहुसांस्कृतिक स्वीकृति के बावजूद, इसकी धार्मिक नींव को नकारना उचित नहीं माना जा रहा है।