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ओणम का भोजन बदल रहा है, परंपरा से आधुनिकता की ओर
केरल के त्योहार ओणम पर बनने वाले पारंपरिक साध्य में बदलाव आ रहा है। मांस-मछली से लेकर शाकाहारी व्यंजनों तक, यह महत्वपूर्ण भोजन अब दाम और स्वाद दोनों में विकसित हो रहा है।
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केरल के प्रसिद्ध त्योहार ओणम पर परोसे जाने वाले पारंपरिक साध्य भोजन में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहे हैं। राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में इस महत्वपूर्ण व्यंजन की तैयारी और सामग्री में क्षेत्रीय विविधता बढ़ी है, जो स्थानीय लोगों के बदलते स्वाद को दर्शाता है।
मलाबार क्षेत्र में पारंपरिक रूप से मांस और मछली का प्रचुर उपयोग होता रहा है, जबकि केरल के दक्षिणी हिस्सों में शाकाहारी विकल्पों की मांग बढ़ी है। भोजन परिवर्तन की यह प्रवृत्ति समकालीन जीवनशैली और आहार संबंधी विकल्पों में बदलाव का परिणाम है। नई पीढ़ी अपनी पारंपरिक जड़ों को सम्मानित करते हुए आधुनिक व्यंजनों को भी शामिल कर रही है।
साध्य को तैयार करने की लागत भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। गुणवत्तापूर्ण सामग्री की कीमतें बढ़ने और तैयारी में अधिक समय लगने से परिवारों के लिए यह उत्सव भोजन अब पहले से अधिक महंगा हो गया है। फिर भी, ओणम पर साध्य परिवार के साथ मिलकर भोजन करने की परंपरा अपनी महत्ता बनाए हुए है।