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केरल में 17 नदियों में रेत खनन को मंजूरी देने से पर्यावरणविदों में रोष
केरल सरकार के रेत खनन की अनुमति देने के निर्णय को बाढ़ नियंत्रण के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण संगठनों का आरोप है कि इसमें कोई पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन नहीं किया गया है।
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केरल में पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन सोसाइटी फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ द एनवायरनमेंट, केरल (एसपीईके) ने राज्य सरकार के 17 नदियों में रेत खनन की अनुमति देने के निर्णय पर गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन का कहना है कि यह निर्णय बाढ़ प्रबंधन के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इसके लिए कोई उचित पर्यावरणीय प्रभाव आकलन नहीं किया गया है।
पर्यावरणकर्मियों का तर्क है कि यह नीति सभी नदियों और जलधाराओं से रेत के अनियंत्रित खनन का बहाना बन सकती है। उनके अनुसार, इस तरह के व्यापक खनन से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है, जिससे जलीय जीवन और भूमिगत जल स्तर दोनों पर असर पड़ेगा।
एसपीईके ने सरकार से माँग की है कि किसी भी खनन परियोजना को मंजूरी देने से पहले व्यापक पर्यावरणीय अध्ययन करवाया जाए और स्थानीय समुदायों के साथ परामर्श किया जाए। संगठन का कहना है कि बाढ़ नियंत्रण के नाम पर प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन केरल के दीर्घकालीन पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।