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तिरुवनंतपुरम चिड़ियाघर के अकेले गैंडे जादू का निधन
तिरुवनंतपुरम चिड़ियाघर में रहने वाला भारतीय गैंडा जादू का 39 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। चिड़ियाघर के कर्मचारियों द्वारा प्रिय इस जानवर की अचानक मृत्यु से जीव संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण क्षति हुई है।
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केरल की राजधानी के चिड़ियाघर में दशकों से रहने वाला गैंडा जादू अब नहीं रहा। यह एक भारतीय गैंडा था जो चिड़ियाघर के सबसे आकर्षक प्राणियों में से एक माना जाता था। स्टाफ के सदस्य इसे अक्सर शंभु के नाम से भी बुलाते थे और इस जानवर से गहरा आत्मीय संबंध रखते थे।
चिड़ियाघर के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि जादू 39 साल की उम्र में मर गया। गैंडे का उन्नत आयु और संभावित स्वास्थ्य समस्याएं इसके निधन के कारण माने जा रहे हैं। इस प्रजाति के संरक्षण के लिए चिड़ियाघर किए जाने वाले प्रयासों में यह मृत्यु एक गंभीर नुकसान है।
भारतीय गैंडा दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण वन्यजीव है जो विलुप्त होने के कगार पर है। राष्ट्रीय चिड़ियाघर नेटवर्क इन जानवरों के संरक्षण और प्रजनन कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तिरुवनंतपुरम चिड़ियाघर भी इस महत्वपूर्ण कार्य का हिस्सा रहा है।
जादू की मृत्यु से दक्षिण भारत में गैंडों की जनसंख्या में और कमी आई है। संरक्षणवादी इस घटना को गंभीरता से ले रहे हैं और भविष्य में ऐसे प्राणियों के बेहतर संरक्षण की मांग कर रहे हैं। चिड़ियाघर प्रशासन इस नुकसान के लिए शोक व्यक्त कर रहा है।