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जूनोटिक बीमारियों के खतरे के बावजूद केरल का पशु चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग अभी तक स्थापित नहीं
2016 में ओमन चांडी कैबिनेट द्वारा मंजूर गीता एन. पॉटी पैनल की सिफारिशों में पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य अनुभाग की स्थापना शामिल थी। लेकिन यह विभाग अब तक नहीं बना है।
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केरल में उभरती जूनोटिक बीमारियों के बढ़ते खतरे के बीच एक समर्पित पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य विभाग की स्थापना अभी भी अधूरी रह गई है। 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ओमन चांडी की कैबिनेट द्वारा मंजूर गीता एन. पॉटी पैनल की सिफारिशों में इस विभाग की स्थापना को प्राथमिकता दी गई थी।
पैनल ने राज्य के स्वास्थ्य और पशु कल्याण तंत्र को मजबूत करने के लिए इस समर्पित अनुभाग के महत्व को रेखांकित किया था। पशुओं से मनुष्यों में फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम और नियंत्रण में यह विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता था।
राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस विभाग की स्थापना से पशु और मानव स्वास्थ्य के बीच समन्वय बेहतर हो सकता है। जूनोटिक रोगों के प्रकोप से बचाव के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता है।
हालांकि सरकार ने सिफारिशें स्वीकार की थीं, लेकिन कार्यान्वयन में देरी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तनों को लागू करने में जल्द कार्रवाई आवश्यक है।