LSN News › India

Politics · India Bureau

केरल में सस्ती निजी स्वास्थ्य सेवा का सपना अधूरा रह गया

केरल सरकार सस्ती स्वास्थ्य सेवा के लिए नया विधेयक तैयार करने जा रही है, लेकिन निजी अस्पताल और क्लीनिक नियामक ढांचे का विरोध कर रहे हैं। 2018 के एक महत्वपूर्ण कानून को फिर से सुर्खियों में लाया गया है।

LSN India · 6 October 2026

केरल में सस्ती निजी स्वास्थ्य सेवा का सपना अधूरा रह गया

केरल में सस्ती और किफायती निजी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने की बात करना जितना आसान है, उसे कार्यान्वित करना उतना ही मुश्किल साबित हो रहा है। राज्य सरकार इस दिशा में एक नया विधेयक तैयार करने की तैयारी में है, जिससे 2018 में पारित केरल क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स (पंजीकरण और नियमन) अधिनियम फिर से चर्चा में आ गया है।

यह अधिनियम निजी और सार्वजनिक दोनों स्वास्थ्य क्षेत्र को एक समान नियामक ढांचे के तहत लाने का उद्देश्य रखता है। हालांकि, निजी अस्पतालों और क्लीनिकों का एक बड़ा वर्ग इस कानून के कार्यान्वयन का विरोध करता रहा है। वे मानते हैं कि कड़े नियम उनके व्यावसायिक हितों को नुकसान पहुंचाएंगे।

निजी स्वास्थ्य क्षेत्र द्वारा इस नियामक ढांचे के प्रति प्रतिरोध केरल में स्वास्थ्य सुधार के प्रयासों में एक बड़ी बाधा बन गया है। सरकार जहां स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही लाना चाहती है, वहीं निजी क्षेत्र अपनी स्वायत्तता बनाए रखने पर जोर दे रहा है।

नए विधेयक के माध्यम से केरल सरकार निजी और सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच एक संतुलन स्थापित करने की कोशिश कर रही है। इसका लक्ष्य आम लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करना है, लेकिन यह प्रयास निजी क्षेत्र के प्रतिरोध के कारण जटिल हो गया है।