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केरल में छात्र संघ ने कांथपुरम समस्था परिपत्र को महिला-विरोधी बताया
केरल स्टूडेंट्स फेडरेशन ने कांथपुरम समस्था द्वारा जारी एक परिपत्र की आलोचना की है। संगठन का कहना है कि यह परिपत्र महिलाओं के अधिकारों के विरुद्ध है।
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केरल में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) ने कांथपुरम समस्था द्वारा जारी एक परिपत्र को महिला-विरोधी करार देते हुए इसकी कड़ी आलोचना की है। एसएफआई के राज्य सचिव पी.एस. संजीव ने यह बयान देते हुए कहा कि केरल की मुस्लिम महिलाओं ने समाज में महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है।
संजीव ने मुस्लिम महिलाओं की उपलब्धियों के उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायमूर्ति एम. फातिमा बीवी की नियुक्ति 1989 में भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पहली महिला न्यायाधीश के रूप में की गई थी। यह नियुक्ति भारतीय न्यायिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुई।
एसएफआई का तर्क है कि समाज में महिलाओं की भूमिका को प्रतिबंधित करने वाले किसी भी प्रयास का विरोध किया जाना चाहिए। संगठन ने कहा है कि महिलाओं के सर्वांगीण विकास और उनके अधिकारों की सुरक्षा सभी के लिए महत्वपूर्ण है।
यह विवाद केरल में महिलाओं के अधिकारों और धार्मिक संस्थाओं की भूमिका को लेकर चल रही बहस का हिस्सा है। विभिन्न सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।