World · India Bureau
केरल में बाढ़ के सात साल बाद भी आदिवासी परिवार अस्थायी झोपड़ियों में रहते हैं
मलप्पुरम जिले में चालियार नदी के किनारे पनिया आदिवासी समुदाय के दो दर्जन से अधिक परिवार प्लास्टिक की झोपड़ियों में जीवन यापन कर रहे हैं। सात वर्ष पहले आई बाढ़ के बाद भी उन्हें स्थायी आश्रय नहीं मिल सका है।
LSN India ·

केरल के मलप्पुरम जिले में एक दशकीय संकट का सामना कर रहे पनिया आदिवासियों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। चालियार नदी के वन क्षेत्रों में फैली बस्तियों में रहने वाले इन परिवारों के पास बस प्लास्टिक की झोपड़ियां ही हैं। सात साल पहले आई भीषण बाढ़ ने इन समुदायों को विस्थापित कर दिया था, लेकिन पुनर्वास की कोशिशें अधूरी रह गई हैं।
चालियार नदी के किनारे बसे इस आदिवासी समुदाय के पास आजीविका के सीमित साधन हैं। वन क्षेत्रों में अस्थायी आश्रय में रहते हुए ये परिवार प्रतिकूल मौसम और बीमारियों का सामना करते हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच भी उनके लिए गंभीर समस्या बनी हुई है।
पनिया जनजाति दक्षिण भारत में सबसे कमजोर समुदायों में से एक मानी जाती है। इस इलाके के आदिवासी समुदायों की दीर्घकालीन समस्याएं स्थानीय और राज्य प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। बाढ़ से प्रभावित इन परिवारों के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।