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केरल वन्यजीव बोर्ड के पुनर्गठन पर पर्यावरणविदों का विरोध
केरल राज्य वन्यजीव बोर्ड के नए सदस्यों के चयन को लेकर पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। आलोचकों का कहना है कि कुछ नामांकित सदस्य वन्यजीव संरक्षण के प्रति पर्याप्त प्रतिबद्ध नहीं हैं।
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केरल के वन्यजीव बोर्ड के पुनर्गठन से जुड़े निर्णय को लेकर पर्यावरण संगठनों में असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। बोर्ड के नए सदस्यों के चयन पर पर्यावरणविदों ने आपत्ति जताई है, उनका तर्क है कि कुछ नामांकित सदस्यों का वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में पर्याप्त ट्रैक रिकॉर्ड नहीं है।
बोर्ड की संरचना में मुख्यमंत्री अध्यक्ष के रूप में और वन मंत्री उपाध्यक्ष के रूप में कार्य करते हैं। नए गठन में तीन विधायक भी शामिल किए गए हैं, जिससे बोर्ड की राजनीतिक संरचना में वृद्धि हुई है।
पर्यावरण कार्यकर्ताओं का मानना है कि वन्यजीव संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मामलों में विशेषज्ञता और समर्पण होना चाहिए। उनके अनुसार, बोर्ड की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करती है कि इसमें ऐसे सदस्य हों जो पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध हों।
यह विरोध केरल में वन्यजीव संरक्षण नीति और बोर्ड की भूमिका को लेकर व्यापक बहस का हिस्सा है। आने वाले दिनों में राज्य सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण की अपेक्षा की जा रही है।