Culture & Entertainment · India Bureau
थेय्यम परंपरा में महिला कारीगर ने रचा इतिहास, पुरुष प्रधान क्षेत्र में दक्षता का प्रदर्शन
केरल के पय्यन्नूर के पास कन्नायी मुक्कोट्टु में रहने वाली एक महिला कारीगर ने थेय्यम परंपरा के वस्त्र और आभूषण निर्माण के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता स्थापित की है। पिता से सीखी गई इस कला को वह पीढ़ियों तक पहुंचाने का काम कर रही हैं।
LSN India ·

केरल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा में थेय्यम एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। इस प्राचीन अनुष्ठान परंपरा में एक महिला कारीगर ने अपने कौशल और समर्पण के माध्यम से एक नया आयाम जोड़ा है। पय्यन्नूर के निकट कन्नायी मुक्कोट्टु में निवास करने वाली यह महिला थेय्यम का अनुष्ठान मौसम आते ही परिधान और आभूषण निर्माण में व्यस्त हो जाती हैं।
इस कारीगर ने अपने पिता से यह पारंपरिक कौशल सीखा था और आज वह इस विशिष्ट कला में एक प्रतिष्ठित और अत्यंत सम्मानित कारीगर के रूप में जानी जाती हैं। उनका काम न केवल थेय्यम परंपरा को जीवंत रखता है, बल्कि इस पुरुष-प्रधान क्षेत्र में महिलाओं की सक्रिय भूमिका को भी दर्शाता है। प्रत्येक थेय्यम मौसम में उनके द्वारा निर्मित परिधान और सजावट के टुकड़े इस परंपरागत अनुष्ठान की पहचान बन गए हैं।
इस महिला कारीगर की दक्षता और समर्पण केरल की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उनके प्रयास दिखाते हैं कि कैसे परंपरागत कलाएं न केवल जीवित रहती हैं, बल्कि समकालीन समाज में भी प्रासंगिक बनी रहती हैं। इस तरह की पहल क्षेत्रीय संस्कृति के संरक्षण और महिला कारीगरों के सशक्तिकरण दोनों के लिए प्रेरणादायक साबित हो रही है।