Culture & Entertainment · India Bureau
कुमारतुली में मिट्टी से जीवंत होती हैं देवी दुर्गा की मूर्तियां
कोलकाता के ऐतिहासिक कुम्हार मोहल्ले में इस पूजा के मौसम में हजारों पर्यटक और फोटोग्राफर कलाकारों की कारीगरी को देखने के लिए खुली कार्यशालाओं का दौरा कर रहे हैं। देवी दुर्गा की भव्य मूर्तियों के निर्माण की परंपरागत प्रक्रिया सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही है।
LSN India ·

कोलकाता के कुमारतुली इलाके की संकरी गलियों में पीढ़ियों से चली आ रही परंपरागत मूर्तिकला का काम इस दिनों पूरे जोर पर है। देवी दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं को आकार देने में लगे कारीगरों की बारीक कारीगरी को देखने के लिए देशी-विदेशी पर्यटकों की भीड़ इन कार्यशालाओं में उमड़ी हुई है।
इस ऐतिहासिक क्षेत्र में स्थित खुली कार्यशालाओं में मिट्टी को धीरे-धीरे वांछित रूप देने की प्रक्रिया किसी जादू से कम नहीं है। कारीगर अपने हाथों और परंपरागत उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए देवी की मूर्तियों के हर सूक्ष्म विवरण पर काम करते हैं, जिसके लिए महीनों की तपस्या और कौशल की आवश्यकता होती है।
पूजा का मौसम शुरू होते ही यह क्षेत्र आर्ट और संस्कृति का एक जीवंत केंद्र बन जाता है। फोटोग्राफर और सोशल मीडिया के प्रेमी इन कारीगरों की मेहनत को कैद करने के लिए यहां आते हैं, जिससे यह परंपरा विश्व पटल पर भी पहचान बनाती है।
कुमारतुली की इस परंपरा को जीवंत रखने में स्थानीय कारीगर परिवारों की भूमिका अप्रतिम है। ये छोटी-मोटी कार्यशालाएं न केवल आर्ट का संरक्षण करती हैं, बल्कि स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार और आर्थिक सहायता का स्रोत भी बनी हुई हैं।