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कोणसीमा रेलवे परियोजना 25 साल बाद भी अधर में, विकास की बाट जोहते स्थानीय
गोदावरी नदी पर तीन पुलों सहित 57 किमी लंबी कोटिपल्ली-नरसापुर रेल लाइन परियोजना की नींव पड़े एक चौथाई सदी बीत गई, लेकिन यह अब भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। स्थानीय लोग और व्यापारी क्षेत्रीय राजनेताओं की राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी को परियोजना के ठहराव के लिए दोषी मानते हैं।
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कोणसीमा क्षेत्र में रेल संपर्क की कमी से व्यापार, पर्यटन और आवागमन को गंभीर नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह महत्वाकांक्षी परियोजना आंध्र प्रदेश के गोदावरी क्षेत्र को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़ने का वादा करती रही है, लेकिन लगातार सरकारें इस दिशा में ठोस कदम उठाने में विफल रहीं।
कोटिपल्ली और नरसापुर को जोड़ने वाली यह 57 किमी की रेल लाइन परियोजना को पूरा होने में आने वाली बाधाओं की जांच से पता चलता है कि संसाधनों की कमी, नियामक अनुमतियों में देरी और प्रशासनिक सुस्ती इसके विलंब के मुख्य कारण हैं। स्थानीय व्यापारियों का मानना है कि गोदावरी क्षेत्र के चुने हुए प्रतिनिधियों ने इस विकास परियोजना को आवश्यक राजनीतिक प्राथमिकता नहीं दी है।
क्षेत्र के आर्थिक विकास के लिए इस रेल लाइन की महत्ता को देखते हुए स्थानीय समुदाय और सामाजिक संगठन केंद्र और राज्य सरकारों से इस परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक परियोजना को वास्तविक रूप में धरातल पर लाने के लिए कोई ठोस समय सारणी घोषित नहीं की गई है।