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लेह में ईरानी केसर की खेती का प्रयोग, 90,000 कॉर्म लगाए गए
लद्दाख के कठोर पर्वतीय इलाकों में प्रीमियम फसल के संभावनाओं को परखने के लिए लेह में 800 किलोग्राम ईरानी केसर के कॉर्म रोपे जा रहे हैं। यह प्रयोगात्मक परियोजना क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को रूपांतरित करने का संभावित मार्ग प्रशस्त कर सकती है।
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लद्दाख प्रशासन ने अपनी कृषि अर्थव्यवस्था को विविधतापूर्ण बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी पदक्षेप उठाया है। लेह क्षेत्र में 90,000 ईरानी केसर कॉर्म लगाकर यह क्षेत्र दुनिया की सबसे कीमती मसालों में से एक की खेती की संभावना जांच रहा है। इस प्रयोग में कुल 800 किलोग्राम केसर के कॉर्म का उपयोग किया जा रहा है।
लद्दाख की भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती हैं, किंतु इसके अनुकूल जलवायु और मिट्टी की गुणवत्ता ने विशेषज्ञों को केसर की खेती के लिए आशान्वित किया है। ईरान विश्व का सबसे बड़ा केसर उत्पादक है, और उसके कॉर्म का उपयोग करके लद्दाख इस मूल्यवान फसल की उपयुक्तता को परखना चाहता है।
यह प्रयोगात्मक परियोजना न केवल स्थानीय किसानों के लिए आय के नए स्रोत उत्पन्न कर सकती है, बल्कि लद्दाख को वैश्विक केसर बाजार में भी स्थापित कर सकती है। सफल परिणाम मिलने की स्थिति में इसे क्षेत्र की प्रधान कृषि फसलों में शामिल किया जा सकता है।
वर्तमान में यह परियोजना अपने प्रारंभिक चरण में है और आने वाले मौसमों में केसर के पौधों की वृद्धि और पैदावार की बारीकी से निगरानी की जाएगी। लद्दाख के कृषि विभाग ने इस परियोजना को सफल बनाने के लिए आवश्यक तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करने की तैयारी की है।