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झील से 70% लकड़ी हटाने के बाद पीली पर्च मछली लुप्त हो गई
एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि झील से 70 प्रतिशत पेड़ों की लकड़ी हटाने के बाद मात्र दो वर्षों में पीली पर्च मछलियों की प्रजाति लगभग विलुप्त हो गई। यह खोज जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में बड़े परिवर्तनों के प्रभावों को उजागर करती है।
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वैज्ञानिकों के एक दल ने झील के पारिस्थितिकी तंत्र पर जलमग्न लकड़ी के महत्व को प्रदर्शित करने वाला एक महत्वपूर्ण अध्ययन पूरा किया है। अनुसंधान में झील से 70 प्रतिशत गिरी हुई लकड़ी को हटाया गया, जिसके बाद पीली पर्च मछली की जनसंख्या में तेजी से गिरावट देखी गई।
शोधकर्ताओं के अनुसार, झील के तल पर पड़ी लकड़ी स्थानीय मछलियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण आवास प्रदान करती है। यह संरचना मछलियों को शिकारियों से बचाव, भोजन के स्रोत और प्रजनन के स्थान प्रदान करती है। जलमग्न लकड़ी के हटाए जाने से पीली पर्च को इन सभी सुविधाओं से वंचित होना पड़ा।
मात्र दो वर्षों के अंदर, झील में पीली पर्च की संख्या में नाटकीय रूप से कमी आई। यह परिणाम यह दर्शाता है कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र में किए जाने वाले बड़े परिवर्तन स्थानीय जलीय जीवन को कितनी तेजी से प्रभावित कर सकते हैं।
इस अध्ययन से मिली जानकारी झील और जलाशयों के प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ प्रदान करती है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि जलीय पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा के लिए प्राकृतिक संरचनाओं, जैसे जलमग्न लकड़ी, को संरक्षित रखना आवश्यक है।