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बंगाल में वामपंथी किताबों की दुकानों पर हमले को लेकर विवाद
कोलकाता और बंगाल के अन्य जिलों में दुर्गा पूजा पंडालों के पास वामपंथी दलों की किताबों की दुकानों को तोड़ने या हटाए जाने की घटनाओं की रिपोर्ट आ रही है। इस मामले में आरएसएस और बंगाल के वित्त मंत्री ने भी टिप्पणी की है।
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कोलकाता और बंगाल के विभिन्न जिलों में दुर्गा पूजा के दौरान वामपंथी संगठनों की किताबों की दुकानों पर हमले और उन्हें हटाए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी), भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) मुक्ति ने इन घटनाओं को लेकर आरोप लगाए हैं कि उनके प्रकाशनों की बिक्री स्टालों को निशाना बनाया गया है।
बंगाल सरकार के वित्त मंत्री और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) दोनों ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस तरह की कार्रवाइयों की निंदा की है और सार्वजनिक स्थलों पर विभिन्न विचारधाराओं के लिए समान स्थान सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
दुर्गा पूजा के समय कोलकाता और अन्य शहरों में हजारों पंडाल और स्टाल लगाए जाते हैं जहां विभिन्न संगठन और समूह अपनी सामग्री बेचते हैं। वामपंथी दलों का आरोप है कि इस बार उनकी किताबों की दुकानों को विशेषकर निशाना बनाया गया है, जिससे सांस्कृतिक कार्यक्रमों में विविधता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल उठता है।
यह घटना बंगाल में राजनीतिक तनाव के बीच सामने आई है और सामाजिक सद्भावना बनाए रखने की आवश्यकता को रेखांकित करती है। अधिकारियों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले की गहन जांच करें और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।