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लिश्टेंस्टाइन ने 400 साल का नियम तोड़ा: अब राजसिंहासन पर बेटियों का अधिकार

लिश्टेंस्टाइन ने अपने राजशाही उत्तराधिकार कानूनों में सुधार किया है। अब सिंहासन पर पहलौठा बेटा-बेटी दोनों ही दावेदार हो सकेंगे, चाहे वह पुरुष हो या महिला।

LSN India · 18 August 2026

लिश्टेंस्टाइन ने 400 साल का नियम तोड़ा: अब राजसिंहासन पर बेटियों का अधिकार

यूरोपीय राजसिंहासन के इतिहास में लिश्टेंस्टाइन का यह कदम एक महत्वपूर्ण सुधार है। देश ने अपने राजकीय उत्तराधिकार के नियमों को बदलते हुए लैंगिक समानता की ओर एक प्रगतिशील कदम उठाया है। इस नए कानून के तहत अब किसी भी राजकुमारी को पहलौठे होने के आधार पर सिंहासन का उत्तराधिकारी बनने का अधिकार होगा। यह फैसला 400 साल पुरानी परंपरा को तोड़ता है जो केवल पुरुष वारिसों को राजसिंहासन देने की अनुमति देती थी।

यूरोप में यह प्रवृत्ति क्रमशः बदल रही है। ब्रिटेन ने 2011 में इसी तरह का एक ऐतिहासिक सुधार किया था, जिसने राजसिंहासन के उत्तराधिकार में लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त कर दिया। इसके बाद से कई अन्य यूरोपीय राज्यों ने भी समान कानूनी सुधार किए हैं। लिश्टेंस्टाइन का यह निर्णय इस बढ़ती प्रवृत्ति में शामिल होता है।

दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के संदर्भ में, जापान अभी भी अपनी केवल-पुरुष उत्तराधिकार नीति के साथ जूझ रहा है। जहां जापानी राजशाही में महिलाओं को सिंहासन पर बैठने की अनुमति नहीं है, वहीं लिश्टेंस्टाइन का यह कदम वैश्विक स्तर पर राजशाही संस्थाओं में लैंगिक न्याय की बढ़ती मांग को दर्शाता है।