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आजीवन कैदी सालाना 40 दिन की छुट्टी दो किस्तों में ले सकते हैं: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि जेल प्रशासन आजीवन कैदियों को साल में एक बार ही छुट्टी लेने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। न्यायाधीशों ने माना कि कैदियों को अपनी सुविधानुसार छुट्टी के दिनों को बांटने का अधिकार है।
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मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे कैदियों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है। न्यायाधीश अनीता सुमंथ और सुंदर मोहन की पीठ ने निर्णय दिया कि कैदियों को सालाना 40 दिन की छुट्टी दो किस्तों में लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल प्राधिकार कैदियों को यह अधिकार नहीं है कि वे छुट्टी के दिनों को साल में केवल एक बार ही लेने के लिए बाध्य करें।
यह फैसला कैदियों के मानवाधिकार और उनकी व्यक्तिगत स्वायत्तता से संबंधित मामलों में एक महत्वपूर्ण विकास है। न्यायालय ने माना कि पुनर्वास और मानसिक स्वास्थ्य की दृष्टि से कैदियों को अपनी छुट्टियों का उपयोग करने का लचीलापन दिया जाना चाहिए। इससे परिवार से मिलने और व्यक्तिगत मामलों को संभालने में कैदियों को अधिक सुविधा मिलेगी।
अदालत का यह निर्णय सभी जेल प्रशासनों के लिए बाध्यकारी है। जेल अधिकारियों को अब कैदियों की छुट्टी के आवेदनों पर उदारता से विचार करना होगा और उन्हें साल में दो बार तक छुट्टी लेने की अनुमति देनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल कैदियों के लिए बल्कि कारागारों में सुधार और पुनर्वास कार्यक्रमों के लिए भी सकारात्मक परिणाम लाएगा।