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लिवर की आत्मचिकित्सा क्षमता सीमित, शुरुआती इलाज जरूरी

असंतुलित आहार और अस्वस्थ जीवनशैली से यकृत रोग भारत में तेजी से बढ़ रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि लिवर में खुद को ठीक करने की प्राकृतिक क्षमता होती है, लेकिन यह एक निश्चित स्तर तक ही प्रभावी रहती है।

LSN India · 21 October 2026

लिवर की आत्मचिकित्सा क्षमता सीमित, शुरुआती इलाज जरूरी

भारत में फैटी लिवर रोग की घटनाएं चिंताजनक दर से बढ़ रही हैं, जिसका प्रमुख कारण खराब आहार और निष्क्रिय जीवनशैली को माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यकृत में एक अद्भुत पुनर्जनन क्षमता होती है जो इसे क्षति से उबरने में सहायता करती है। यह प्रक्रिया, जिसे लिवर रीजनरेशन कहा जाता है, शरीर की सबसे महत्वपूर्ण स्वयं-मरम्मत प्रणालियों में से एक है।

हालांकि, यह आत्मचिकित्सा क्षमता सभी परिस्थितियों में समान रूप से कार्य नहीं करती। स्वास्थ्य विशेषज्ञ चेताते हैं कि जब यकृत रोग एक निश्चित चरण में पहुंच जाता है, तो इसकी मरम्मत की क्षमता महत्वपूर्ण रूप से कम हो जाती है। सिरोसिस जैसी उन्नत स्थितियों में, क्षति अक्सर स्थायी हो जाती है और उपचार में कठिनाई बढ़ जाती है।

चिकित्सा पेशेवर रोकथाम और शुरुआती पहचान पर जोर दे रहे हैं। संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और अल्कोहल के सेवन में संयम बीमारी के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लिवर के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच और समय पर चिकित्सा परामर्श अत्यंत आवश्यक है।