World · India Bureau
LPG कनेक्शन से आगे: ग्रामीण भारत में स्वच्छ ईंधन की असली चुनौती
नई स्टडी में पता चला है कि गांवों में LPG कनेक्शन बढ़ने के बावजूद अधिकांश परिवार इसका पूरा उपयोग नहीं कर रहे हैं। रिफिल की कीमत और डिलीवरी की समस्या स्वच्छ ईंधन अपनाने में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई है।
LSN India ·

भारत के ग्रामीण इलाकों में LPG कनेक्शन का विस्तार तेजी से हुआ है, लेकिन यह सफलता की पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। ऊर्जा अनुसंधान संस्थान (CEEW) की ताजा स्टडी में सामने आया है कि ग्रामीण भारत में केवल 23 प्रतिशत परिवार ही LPG पर पूरी तरह निर्भर हैं। शेष परिवार अभी भी लकड़ी, गोबर और अन्य परंपरागत ईंधन का उपयोग करते रहते हैं।
कनेक्शन की संख्या में वृद्धि के बावजूद गांवों में स्वच्छ ईंधन के उपयोग में ठहराव आया है। इसके पीछे मुख्य कारण हैं - रिफिल की बढ़ती कीमत और कमजोर डिलीवरी व्यवस्था। कई दूरवर्ती इलाकों में गैस सिलिंडर नियमित रूप से नहीं मिल पाती, जिससे परिवार अपनी पुरानी आदतों पर लौट जाते हैं। LPG की लागत गांवों की आर्थिक स्थिति के अनुरूप नहीं रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्वच्छ ईंधन अपनाने की सफलता को केवल कनेक्शन संख्या से नहीं, बल्कि वास्तविक उपयोग से मापा जाना चाहिए। नीति निर्माताओं के लिए अब यह जरूरी हो गया है कि वे रिफिल की सस्ती आपूर्ति और बेहतर वितरण ढांचे पर ध्यान दें। गांवों में खाना पकाने के लिए स्वच्छ ईंधन को वाकई आम बनाने के लिए इन व्यावहारिक समस्याओं का समाधान अनिवार्य है।