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बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत पर न्यायाधीश का व्यंग्य पत्र
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के मामले में जिला न्यायाधीश अभिजीत दिपके ने व्यंग्य पत्र जारी किया है। उन्होंने अपनी नैतिक चिंता व्यक्त करते हुए पद से इस्तीफे की घोषणा की है।
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बालाघाट में हुई बच्चों की मौतों के संदर्भ में जिला न्यायाधीश अभिजीत दिपके ने सरकार को लक्ष्य करते हुए एक व्यंग्यात्मक पत्र जारी किया है। उनके पत्र में मध्य प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।
दिपके ने अपने पत्र में कहा है कि उन्हें इस पद पर बने रहना अब संभव नहीं है क्योंकि उनका विवेक इसकी अनुमति नहीं दे रहा है। जिले में 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत के बाद उन्होंने यह कदम उठाया है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था की विफलता स्पष्ट होती है।
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतें एक गंभीर मानवीय संकट बन गई हैं। न्यायाधीश के व्यंग्य पूर्ण पत्र से सरकारी तंत्र की जवाबदेही और संवेदनशीलता के प्रश्न उठ खड़े हुए हैं।
यह घटना राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं, सामाजिक कल्याण और आदिवासी इलाकों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी करती है। न्यायाधीश के इस कदम ने इस संकट की गंभीरता को लेकर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।