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भ्रूण विकृति के मामले में गर्भपात का अधिकार मां को: मद्रास उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि गर्भावस्था के 24 सप्ताह के बाद भी मां को भ्रूण संबंधी असामान्यताओं के कारण गर्भपात कराने का अधिकार है। न्यायालय ने चिकित्सा बोर्ड के इनकार को रद्द करते हुए प्रक्रिया की अनुमति दी।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि गर्भावस्था के 24 सप्ताह के बाद भी यदि भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं पाई जाती हैं, तो मां को गर्भपात कराने का अधिकार है। यह निर्णय एक महिला की याचिका पर दिया गया था जिसके बच्चे के मस्तिष्क में असामान्यताएं स्कैन में पाई गई थीं।
अदालत ने चिकित्सा बोर्ड द्वारा गर्भपात की अनुमति देने से इनकार करने के निर्णय को रद्द कर दिया। न्यायालय का मत है कि ऐसी परिस्थितियों में मां की इच्छा और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह निर्णय मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी अधिनियम के अंतर्गत दिया गया है।
इस फैसले से प्रजनन अधिकारों से संबंधित कानूनी मामलों में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित हुई है। अदालत ने माना कि गर्भवती महिला के स्वास्थ्य और मानसिक कल्याण को ध्यान में रखते हुए ऐसे मामलों में लचीलापन आवश्यक है।
विधिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत में प्रजनन स्वायत्तता के अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण मिसाल प्रस्तुत करता है और भविष्य में ऐसे मामलों में न्यायिक दृष्टिकोण को प्रभावित करेगा।