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मद्रास उच्च न्यायालय ने POCSO अधिनियम के आरोप से दोषी को बरी किया
मद्रास उच्च न्यायालय ने एक मृत्यु दंड प्राप्त दोषी को POCSO अधिनियम के तहत आरोपों से मुक्त कर दिया है, लेकिन एक नौ वर्षीय लड़की की हत्या के लिए उसके दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया है।
LSN India ·

न्यायमूर्ति अनीता सुमंथ और न्यायमूर्ति सुंदर मोहन की खंडपीठ ने इस सप्ताह यह निर्णय सुनाया। दोषी को POCSO (बाल यौन शोषण) अधिनियम के तहत लगाए गए गंभीर आरोपों से बरी किया गया है, जबकि हत्या के मामले में उसकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया है।
न्यायालय ने नौ वर्षीय बालिका की हत्या के लिए दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय मामले में सबूतों के विश्लेषण के बाद आया है। खंडपीठ ने अपने आदेश में विभिन्न कानूनी पहलुओं पर विचार किया और POCSO अधिनियम के तहत आरोपों को साबित नहीं पाया।
यह मामला पिछले कुछ वर्षों से अदालत में विचाराधीन था। दोषी को पहले मृत्यु दंड दिया गया था, लेकिन उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इसे संशोधित करते हुए आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय साक्ष्य के आधार पर दिया गया है।
यह फैसला बाल सुरक्षा कानूनों और उनके कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों को उठाता है। अदालत के निर्णय से स्पष्ट होता है कि किस प्रकार विभिन्न अधिनियमों के तहत आरोपों का अलग-अलग मूल्यांकन किया जाता है।