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मद्रास हाई कोर्ट ने वीरमणि यौन उत्पीड़न मामले में CBI को स्थानांतरण से इनकार किया
मद्रास उच्च न्यायालय ने ग्रेनाइट कारोबारी आर वीरमणि के खिलाफ पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज यौन उत्पीड़न मामले की जांच को केंद्रीय जांच ब्यूरो को स्थानांतरित करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने विशेष जांच दल को मामले की जांच पूरी करने के लिए पर्याप्त समय देने का निर्देश दिया है।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा कि ग्रेनाइट उद्योग के प्रभावशाली व्यक्तित्व आर वीरमणि के खिलाफ दर्ज यौन शोषण के मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंपने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने माना कि राज्य स्तर पर गठित विशेष जांच दल इस मामले की जांच को सफलतापूर्वक संचालित करने में सक्षम है।
पॉक्सो अधिनियम के तहत दायर इस केस में अदालत ने कहा है कि विशेष जांच दल को अपनी जांच पूरी करने के लिए उचित समयावधि दी जानी चाहिए। न्यायालय का मानना है कि जांच को बीच में बाधित करना या एक एजेंसी से दूसरी को स्थानांतरित करना मामले की प्रगति में बाधा डाल सकता है।
इस मामले में स्थानीय पुलिस द्वारा दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट के आधार पर विशेष जांच दल का गठन किया गया था। अदालत का निर्णय इस बात को दर्शाता है कि राज्य स्तरीय जांच तंत्र के प्रति न्यायालय को विश्वास है।
यह निर्णय उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जहां संवेदनशील और गंभीर अपराधों की जांच में एकाधिकार की मांग की जाती है। अदालत का यह रुख सुझाता है कि राज्य की जांच एजेंसियों को भी ऐसे गंभीर अपराधों की जांच का दायित्व सौंपा जा सकता है।