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मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में सड़कों के जातिगत नाम हटाने के लिए याचिका दायर की
मद्रास उच्च न्यायालय ने स्वप्रेरणा से जनहित याचिका लेते हुए तमिलनाडु में सड़कों, मार्गों और इलाकों के नामों से जातिगत संदर्भ हटाने का निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायाधीश जी. अरुल मुरुगन ने अब तक हटाए गए और हटाए जाने बाकी नामों की स्थिति रिपोर्ट मांगी है।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने तमिलनाडु में सार्वजनिक स्थानों के नामों से जातिगत संदर्भों को हटाने के मुद्दे पर स्वप्रेरणा से जनहित याचिका दायर की है। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायाधीश जी. अरुल मुरुगन की पीठ ने इस महत्वपूर्ण मामले को अपने संज्ञान में लिया है।
न्यायालय ने राज्य प्रशासन से यह जानकारी मांगी है कि अब तक सड़कों, मार्गों और आवासीय क्षेत्रों के कितने नाम बदले जा चुके हैं और कितने नाम अभी बदले जाने बाकी हैं। इस संदर्भ में सरकार को विस्तृत स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
यह निर्णय सामाजिक समानता और सार्वजनिक स्थानों पर सभी को समान सम्मान देने के सिद्धांत पर आधारित है। न्यायालय का कदम संवैधानिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करता है और जातिगत भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
यह मामला तमिलनाडु में सामाजिक न्याय और सांस्कृतिक पहचान के प्रश्नों पर एक नई बहस शुरू करने की संभावना रखता है। न्यायालय अगली सुनवाई तक सरकार की प्रगति को ट्रैक करेगा।