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SARFAESI मामलों में वकील आयुक्तों की फीस काम के अनुरूप हो: मद्रास उच्च न्यायालय
मद्रास उच्च न्यायालय ने SARFAESI मामलों में वकील आयुक्तों की एकसमान फीस निर्धारित करने की प्रथा को खारिज किया है। न्यायालय का मानना है कि फीस का निर्धारण किए गए वास्तविक कार्य के आधार पर होना चाहिए।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने SARFAESI (सुरक्षित संपत्ति अधिकार और कार्य प्रवर्तन अधिनियम) संबंधी मामलों में वकील आयुक्तों की पारिश्रमिक निर्धारण के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और न्यायमूर्ति जी. अरुल मुरुगन की खंडपीठ ने कहा कि सभी मामलों के लिए समान फीस निर्धारित करने की प्रथा उचित नहीं है।
न्यायालय ने अपने निर्देश में स्पष्ट किया कि न्यायिक अधिकारियों को वकील आयुक्तों की फीस का निर्धारण करते समय वास्तविक कार्य की मात्रा और जटिलता को ध्यान में रखना चाहिए। विभिन्न SARFAESI मामलों में कार्य की प्रकृति और अवधि अलग-अलग हो सकती है, इसलिए एकसमान शुल्क न्यायोचित नहीं है।
मद्रास उच्च न्यायालय के इस निर्णय से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और वकील आयुक्तों को उनके किए गए वास्तविक कार्य के अनुरूप उचित पारिश्रमिक मिल सकेगा। यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र में संपत्ति वसूली के मामलों में नई दिशा प्रदान करेगा।