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मद्रास हाई कोर्ट ने श्री रामचंद्र ट्रस्ट की जमीन पर अधिग्रहण आदेश रद्द किया
चीफ जस्टिस की बेंच ने फैसला दिया कि एकल न्यायाधीश को रिट याचिका में तमिलनाडु सरकार को ऐसा निर्देश जारी नहीं करना चाहिए था। मामला चेन्नई में 7.44 एकड़ प्राइम जमीन से जुड़ा है।
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मद्रास उच्च न्यायालय की प्रधान न्यायाधीश की बेंच ने श्री रामचंद्र शिक्षा और स्वास्थ्य ट्रस्ट की चेन्नई स्थित 7.44 एकड़ मूल्यवान भूमि को तमिलनाडु सरकार के नियंत्रण में लेने के आदेश को रद्द कर दिया है। बेंच ने माना कि एकल न्यायाधीश को रिट याचिका में राज्य सरकार को इस तरह का निर्देश जारी करने का अधिकार नहीं था।
प्रधान न्यायाधीश की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के महत्वपूर्ण भूमि अधिग्रहण के संबंध में दिए गए निर्देश को न्यायिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। पीठ ने यह भी कहा कि एकल न्यायाधीश द्वारा लिया गया यह कदम उचित नहीं था।
श्री रामचंद्र शिक्षा और स्वास्थ्य ट्रस्ट ने इस आदेश के विरुद्ध प्रधान न्यायाधीश की बेंच में अपील की थी। ट्रस्ट का तर्क था कि भूमि को अधिग्रहीत करने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
इस फैसले से चेन्नई में ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी उदाहरण स्थापित हुआ है। उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भूमि अधिग्रहण जैसे गंभीर मामलों में प्रक्रियात्मक नियमों का सख्त पालन आवश्यक है।