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मद्रास उच्च न्यायालय ने 50 साल से अधिक उम्र की विदेशी महिला को आईवीएफ कराने की अनुमति दी
मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश ने माना कि सहायक प्रजनन तकनीक अधिनियम के तहत निर्धारित आयु सीमा केवल भारत की जीवन प्रत्याशा को ध्यान में रखकर बनाई गई है। न्यायालय ने विदेशी नागरिकों के लिए इस नियम को लागू करने से इनकार कर दिया।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में 50 साल से अधिक उम्र की एक विदेशी महिला को कृत्रिम गर्भाधान (आईवीएफ) उपचार कराने की अनुमति दे दी है। न्यायालय ने यह निर्णय संसद द्वारा सहायक प्रजनन तकनीक (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत निर्धारित आयु सीमा के संबंध में सुनवाई करते हुए दिया।
न्यायाधीश डी. भारत चक्रवर्थी ने अपने निर्णय में कहा कि संसद द्वारा निर्धारित उच्च आयु सीमा केवल भारत में जीवन प्रत्याशा को ध्यान में रखकर तय की गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह प्रावधान विदेशों में जीवन प्रत्याशा के आधार पर नहीं बनाया गया है। न्यायालय के अनुसार, इस आयु सीमा को सभी विदेशी नागरिकों पर समान रूप से लागू करना उचित नहीं है।
यह निर्णय प्रजनन संबंधी अधिकारों और विदेशी नागरिकों के कानूनी अधिकारों की व्याख्या में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है। न्यायालय का यह दृष्टिकोण विभिन्न देशों में जीवन प्रत्याशा के अंतर को स्वीकार करता है और सार्वभौमिक कानूनी प्रावधानों को लागू करते समय इन अंतरों पर विचार करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
इस फैसले से आने वाले समय में भारतीय कानूनों की व्याख्या के संबंध में विदेशी नागरिकों के अधिकारों पर अन्य मामलों में भी बहस हो सकती है। यह निर्णय भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने की इच्छा को प्रदर्शित करता है।