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भूखे ग्राहक नहीं कर सकते दोनों रेस्तरां में अंतर: मद्रास हाईकोर्ट

ट्रेडमार्क विवाद में न्यायाधीश ने तमिल साहित्य के हवाले से फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि भूखे ग्राहक समान नाम वाले दोनों रेस्तरां में अंतर नहीं कर पाएंगे।

LSN India · 31 October 2026

भूखे ग्राहक नहीं कर सकते दोनों रेस्तरां में अंतर: मद्रास हाईकोर्ट

मद्रास हाईकोर्ट ने एक ट्रेडमार्क विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि भूखे ग्राहक 'संगीता' और 'संगेता' नामों वाले दोनों रेस्तरां के बीच अंतर नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति पी.बी. बालाजी ने यह टिप्पणी करते हुए तमिल कवयित्री अवैयार के प्रसिद्ध कथन का उल्लेख किया।

न्यायाधीश ने अपने फैसले में तमिल साहित्य के उस सुविख्यात वाक्य का हवाला दिया जिसमें कहा गया है कि जब भूख लगी हो तो विवेक विलुप्त हो जाता है। इसके अलावा कोर्ट ने तमिल मुहावरे 'पसि कण्ण कट्टुथु' का भी संदर्भ दिया, जो भूख की स्थिति में निर्णय क्षमता को प्रभावित करने की ओर इशारा करता है।

कोर्ट का यह निर्णय इस बात पर केंद्रित है कि आम ग्राहक जब भोजन की खोज में होते हैं, तो समान या मिलते-जुलते नामों वाली दुकानों में भ्रम की संभावना अधिक रहती है। न्यायमूर्ति ने माना कि भूखे व्यक्ति की सतर्कता कम होती है और वह ध्यान से नाम या अन्य पहचान के मानदंडों पर ध्यान नहीं दे सकता।

यह फैसला ट्रेडमार्क कानून में एक महत्वपूर्ण मिसाल स्थापित करता है कि विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठान समान या बहुत मिलते-जुलते नाम नहीं रख सकते, क्योंकि इससे ग्राहकों में भ्रम की स्थिति पैदा होती है। कोर्ट ने इसे अनुचित व्यावसायिक प्रथा माना है।