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मंदिर भूमि की सुरक्षा में असफल HR&CE अधिकारी को बर्खास्त करना सही: मद्रास हाईकोर्ट
मद्रास हाईकोर्ट ने HR&CE कार्यकारी अधिकारी के बर्खास्तगी के फैसले को सही ठहराया है। न्यायाधीश कृष्णास्वामी गोविंदराजन ने तमिलनाडु सरकार से जमीन वापसी के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी है।
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मद्रास हाईकोर्ट ने धार्मिक संपत्ति के संरक्षण में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहने के लिए हिंदू धार्मिक और दान संपत्ति (HR&CE) के एक कार्यकारी अधिकारी के बर्खास्तगी को उचित ठहराया है। न्यायाधीश कृष्णास्वामी गोविंदराजन ने अपने फैसले में कहा कि मंदिर की जमीन को संरक्षित रखना प्रशासकीय अधिकारियों का मुख्य कर्तव्य है।
कोर्ट ने इस मामले में "parens patriae" क्षेत्राधिकार का आह्वान किया, जिसके तहत राज्य को सार्वजनिक हित की रक्षा करने की शक्ति दी जाती है। न्यायाधीश ने तमिलनाडु सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है कि मंदिर की जब्त की गई भूमि को वापस लेने के लिए अब तक कौन से कदम उठाए गए हैं।
यह फैसला धार्मिक संस्थानों की संपत्ति की सुरक्षा को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही और दायित्व पर जोर देता है। हाईकोर्ट का यह निर्णय मंदिर भूमि से संबंधित अन्य मामलों में भी महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकता है।