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मद्रास हाईकोर्ट ने रिजर्व्ड कोच में सोने का समय सीमित करने वाले नियम को चुनौती खारिज की
मद्रास उच्च न्यायालय ने रेलवे के उस नियम को बरकरार रखा है जो रिजर्व्ड कोचों में सोने के समय को प्रतिबंधित करता है। अदालत ने कहा कि यह नियम सभी यात्रियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है।
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मद्रास उच्च न्यायालय ने रेलवे द्वारा निर्धारित नियमों को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है जो रिजर्व्ड कोचों में सोने के समय को सीमित करता है। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि यह प्रतिबंध जनहित को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।
न्यायालय ने माना कि रेलवे का यह नियम सभी यात्रियों की सामान्य सुविधा और आराम सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है। अदालत के अनुसार, सोने के समय को विनियमित करना यात्रियों के बीच कोचों के उचित उपयोग को बनाए रखता है।
इस नियम के तहत रिजर्व्ड कोचों में सोने के लिए विशेष समय निर्धारित किए गए हैं ताकि दिन के विभिन्न समय पर यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को समान सुविधा मिल सके। अदालत की राय में, ऐसे विनियमन से रेल यात्रा का अनुभव सभी के लिए बेहतर होता है।
यह फैसला भारतीय रेलवे के संचालन संबंधी दिशानिर्देशों की वैधता को भी रेखांकित करता है। अदालत ने निर्णय देते हुए कहा कि रेलवे को अपनी सेवाओं को सुचारू रूप से संचालित करने और यात्रियों के हितों की रक्षा करने का अधिकार है।