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नवरात्र में महागौरी पूजन: व्रत कथा और धार्मिक महत्व
इस वर्ष नवरात्र पर्व में सप्तमी तिथि के विशेष प्रभाव के कारण पूजन का क्रम बदलेगा। महागौरी की आराधना 19 अक्टूबर को की जाएगी, जिसे परंपरागत व्रत कथा के साथ मनाया जाता है।
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नवरात्र उत्सव के दौरान देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का विधान है। इस वर्ष सप्तमी तिथि दो दिनों तक रहने के कारण नवरात्र के आठवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी, जबकि मां महागौरी की आराधना 19 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार, महागौरी देवी दुर्गा का नौवां और अंतिम रूप माने जाते हैं। देवी के इस स्वरूप को अत्यंत शक्तिशाली और कल्याणकारी माना जाता है। वैदिक परंपरा में विश्वास है कि दुर्गाष्टमी पर महागौरी की व्रत कथा का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। भक्त इस दिन देवी को विशेष भोग और प्रसाद का प्रयोजन करते हैं। परिवार के कल्याण और आध्यात्मिक उन्नति के लिए महागौरी की पूजा का खास महत्व माना जाता है।
नवरात्र के नौ दिन देवी के विभिन्न रूपों के समर्पित हैं। भक्तजन इन दिनों व्रत रखकर और कथाओं का पाठ करके देवी का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आने वाले पखवाड़े में महागौरी की आराधना से संबंधित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।