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महाराष्ट्र के चर्चों ने भक्तों से लिए जा रहे प्रार्थना सहमति पत्र
धर्मांतरण विरोधी कानून को लेकर महाराष्ट्र के चर्च अपनी सुरक्षा के लिए पूजा-अर्चना करने वाले भक्तों से घोषणा पत्र भर रहे हैं। ये भरे हुए फॉर्म चर्च कार्यालयों में सुरक्षित रखे जाएंगे।
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महाराष्ट्र के चर्चों ने एक असामान्य कदम उठाते हुए अपने भक्तों से प्रार्थना सहमति पत्र प्राप्त करना शुरू कर दिया है। इन आत्म-घोषणा फॉर्मों को भरने का मुख्य उद्देश्य चर्च प्रशासन को संभावित कानूनी जांच से बचाना है।
धर्मांतरण विरोधी कानूनों के कड़े होने के बाद यह पहल की गई है। चर्चों का दावा है कि ये पत्र आत्म-सुरक्षा के लिए हैं और इन्हें चर्च कार्यालयों में संरक्षित रखा जाएगा। यदि सरकारी या पुलिस प्राधिकारियों द्वारा पूछा जाए तो इन दस्तावेजों को प्रस्तुत किया जा सकता है।
ये घोषणा पत्र मूलतः इस बात की पुष्टि करते हैं कि व्यक्तियों ने स्वेच्छा से चर्च में प्रार्थना के लिए आने का निर्णय लिया है। महाराष्ट्र सहित कई राज्यों में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू हैं, जिनके तहत किसी व्यक्ति को बलपूर्वक या प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करना अपराध माना जाता है।
चर्चों का यह कदम धार्मिक संस्थानों द्वारा कानूनी दबाव में अपनी रक्षा के लिए किए जा रहे प्रयासों का एक उदाहरण है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी सुरक्षा के बीच तनाव को दर्शाती है।