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सरोगेसी कारोबार में डॉक्टर पर कार्रवाई, महाराष्ट्र आयोग ने दिया फैसला
महाराष्ट्र स्टेट कमीशन ने एक डॉक्टर को चिकित्सा सेवाओं की सीमा से परे जाकर सरोगेसी व्यवसाय में मध्यस्थ के रूप में काम करने के लिए दायी ठहराया है।
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महाराष्ट्र राज्य उपभोक्ता संरक्षण आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में एक चिकित्सक को उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत जिम्मेदार माना है। आयोग के अनुसार, प्रश्नगत चिकित्सक ने अपने पेशेवर दायरे से परे जाकर सरोगेसी व्यवसाय में व्यापारी और मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी।
आयोग के निष्कर्ष में कहा गया है कि डॉक्टर ने केवल चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने तक सीमित नहीं रहे, बल्कि सरोगेसी से संबंधित व्यावसायिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया। इस व्यवहार को आयोग ने पेशेवर नैतिकता के मानदंडों का उल्लंघन माना है।
यह मामला चिकित्सा पेशेवरों की जिम्मेदारी और उपभोक्ता संरक्षण के अधिकार के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। आयोग का फैसला स्पष्ट संदेश देता है कि चिकित्सकों को अपनी सेवाओं को चिकित्सा क्षेत्र तक सीमित रखना चाहिए और व्यावसायिक हितों के लिए पेशेवर सीमाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए।
यह निर्णय सरोगेसी जैसी संवेदनशील प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और नैतिकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जहां उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।