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आदिवासी क्षेत्रों में सरकारी अस्पतालों के लिए महाराष्ट्र विचार कर रहा निजी-सरकारी भागीदारी मॉडल
महाराष्ट्र सरकार आदिवासी बेल्ट के सार्वजनिक अस्पतालों में सुधार के लिए पीपीपी मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है। इससे पहले सरकार ने डॉक्टरों के लिए आदिवासी-प्राथमिकता पोस्टिंग नीति लागू की थी जिसमें स्नातकोत्तर प्रवेश और कठिन क्षेत्र भत्ते में वरीयता दी जाती है।
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महाराष्ट्र की सरकार राज्य के आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल लागू करने पर गंभीरता से विचार कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य दूरदराज क्षेत्रों के अस्पतालों में चिकित्सा सेवाओं में वृद्धि करना है।
इसके पहले, महाराष्ट्र सरकार ने चिकित्सकों को आदिवासी क्षेत्रों में तैनात करने के लिए एक प्रगतिशील नीति अपनाई थी। इस नीति के तहत, स्नातकोत्तर स्तर के प्रवेश में आदिवासी इलाकों में सेवा देने के इच्छुक डॉक्टरों को वरीयता दी जाती है। साथ ही, इन क्षेत्रों में तैनात चिकित्सकों को कठिन क्षेत्र भत्ता प्रदान किया जाता है ताकि उन्हें अपनी सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
यह पीपीपी मॉडल आदिवासी बेल्ट में स्वास्थ्य सेवा को और मजबूत करने का एक अतिरिक्त कदम माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि निजी क्षेत्र के साथ साझेदारी से अस्पतालों की बुनियादी ढांचा और सेवा की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो सकता है।
यह रणनीति न केवल ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में चिकित्सा सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगी, बल्कि इन क्षेत्रों में कुशल डॉक्टरों की कमी को पूरा करने में भी सहायक हो सकती है।