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महाराष्ट्र एफडीए आयुक्त ने अस्पताल खपत सामग्री की कीमतों पर एनपीपीए को सिफारिश की
महाराष्ट्र के खाद्य और औषधि प्रशासन आयुक्त ने राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य निर्धारण प्राधिकरण को चिकित्सा उपभोग्य वस्तुओं की कीमतों में अंतर को लेकर सिफारिशें दी हैं। आयुक्त के अनुसार रोगियों को यह पता नहीं होता कि वे जो कीमत दे रहे हैं वह वास्तविक लागत है या पहले से तय किया गया मुनाफा।
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महाराष्ट्र के खाद्य और औषधि प्रशासन (एफडीए) के आयुक्त तुकाराम मुंडे ने कहा है कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों को चिकित्सा सामग्री की वास्तविक कीमत के बारे में कोई जानकारी नहीं होती। उन्होंने राष्ट्रीय फार्मास्यूटिकल मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) को इस मुद्दे पर सिफारिशें प्रस्तुत की हैं।
आयुक्त ने बताया कि मरीजों के लिए यह जानना असंभव है कि उन्हें दी गई कीमत वास्तविक लागत पर आधारित है या पहले से निर्धारित मार्कअप पर। यह मुद्दा विशेष रूप से चिकित्सा उपभोग्य वस्तुओं के मामले में महत्वपूर्ण है, जिन्हें रोगी के इलाज के दौरान नियमित रूप से उपयोग किया जाता है।
मुंडे की ओर से दी गई सिफारिशें अस्पताल खपत सामग्री की कीमत निर्धारण में पारदर्शिता लाने के उद्देश्य से की गई हैं। इससे न केवल मरीजों को अनुचित कीमत से बचाया जा सकेगा, बल्कि स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में जवाबदेही भी बढ़ेगी।
यह कदम उन व्यापक प्रयासों का हिस्सा है जो स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के लिए उठाए जा रहे हैं। एनपीपीए इन सिफारिशों पर विचार करके उचित नीति निर्माण कर सकता है।